हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , मजलिस ए उलमा-ए-हिंद के सरबराह मौलाना कल्बे जवाद नक़वी ने आयतुल्लाह सैयद मुजतबा ख़ामेनेई के इस्लामी जम्हूरिया-ए-ईरान के तीसरे रहबर के तौर पर मुन्तख़ब होने के मौके़ पर एक पैग़ाम जारी किया है।
उनके पैग़ाम का मुकम्मल मतन कुछ इस प्रकार है:
بسم اللہ الرحمن الرحیم
الحمد للہ ربّ العالمین والصلاۃ والسلام علی سیدنا و نبینا محمدوآلہ الطاہرین ۔
सबसे पहले हम आपकी खिदमत में हज़रत अमीरुल मोमिनीन (अ.स.) की मज़लूमाना शहादत पर ताज़ियत पेश करते हैं। यक़ीनन आइम्मा-ए-मासूमीन (अ.स.) की शहादत ने हमें राह-ए-ख़ुदा में बेलौस जिहाद और हक़ पर मरने का जज़्बा अता किया है।
मस्जिद-ए-कूफ़ा में हज़रत अली (अ.स.) के सर पर ज़र्बत लगाकर दुश्मनों ने ये बावर कर लिया था कि क़ियादत व हिदायत का सिलसिला यहीं थम जाएगा, मगर इलाही निज़ाम के नुमाइंदे इमाम हसन मुजतबा (अ.स.) ने उम्मत की हिदायत और क़ियादत की बाग-डोर संभाल कर दुश्मन के इरादों को ख़ाक में मिला दिया था।
इसी तरह रहबर-ए-इंक़ेलाब-ए-इस्लामी हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई को शहीद करके इस्तेमारी और इस्तेकबारी ताक़तें ये गुमान कर रही थीं कि उन्होंने निज़ाम-ए-विलायत-ए-फ़क़ीह का ख़ात्मा कर दिया है, मगर अल्हम्दुलिल्लाह ये ग़दीरी सिलसिला रहबर-ए-कबीर आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद रूहुल्लाह ख़ुमैनी र.ह. से होता हुआ आयतुल्लाह सैयद मुजतबा ख़ामेनेई तक आ पहुँचा है और इंशाअल्लाह ज़ुहूर ए इमाम ए अस्र अ.त.फ.तक यूँही जारी व सारी रहेगा।
मजलिस ए ख़ुबरेगान-ए-रहबरी ने जिस तरह इस्तेमारी और इस्तेकबारी धमकियों के बावजूद निज़ाम-ए-इस्लामी के तहफ़्फ़ुज़ और उसकी तंज़ीम के लिए तीसरे वली-ए-फ़क़ीह का इंतेख़ाब किया, इस से मोमिनीन के दिलों को तक़वियत पहुँची।
आलम-ए-इस्लाम के लिए ये एक तारीख़ी लम्हा और दुश्मनों की शिकस्त का वाज़ेह एलान है। यक़ीनन विलायत-ए-फ़क़ीह का निज़ाम 'निज़ाम-ए-ग़दीर' है जिस से आज भी दुश्मन ख़ौफ़ज़दाह है और आइन्दा भी उनके ख़ौफ़ में इज़ाफ़ा होता रहेगा।
इस मौके़ पर हम शीया ए हिन्दुस्तान वली-ए-फ़क़ीह हज़रत आयतुल्लाह सैयद मुजतबा ख़ामेनेई से तजदीद-ए-अहद करते हैं कि हम इसी तरह निज़ाम-ए-विलायत व मरजइयत से मुतमस्सिक रहेंगे और ज़माना-ए-ग़ैबत में वली-ए-फ़क़ीह के दाइरा-ए-इताअत व विलायत में रहते हुए ज़ुहूर-ए-इमाम-ए-अस्र (अ.त.फ.) के लिए ज़मीनासाज़ी करेंगे और ज़ुहूर के वक़्त इंशाअल्लाह इमाम (अ.स.) के नासिरों में शामिल होंगे।
वस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाहि व बरकातुहू
मजलिस-ए-उलमा-ए-हिंद
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